आंबेडकर ने क्यों बौद्ध धर्म चुना??


भीमवादी कहते है की बुद्ध ही सत्य है वैज्ञानिक धर्म है यहाँ का मूल धर्म है। लेकिन इन बातो का कोई ठोस आधार नही।है । ये बाते सिर्फ तर्को से ही खण्डित हो जाती है।
और अगर ये बाते सत्य थी तो इनमे अम्बेडकर को अपनी 22 प्रतिज्ञा जोड़ने की क्या आवश्यकता थी।।

अब आते है की केवल बौद्ध धर्म ही क्यों चुना सिक्ख जैन  आर्यसमाज या फिर ईसाई और इस्लाम क्यों नही।

एक तरफ आप ये भी कहते हो की इन धर्मो में जो लोग गए या जो धर्म बने वो जातिपात या छुआछुत के आधार पे बने तो फिर लोग बौद्ध धर्म में ही क्यों नही गए सिक्ख या इस्लाम या जैन ही  क्यों बने ? और जिन अंग्रेजो छुआछुत को मिटाया और आपको शिक्षा का अधिकार दिया आप ने उन्हें क्यों नही अपनाया ?। ये एक सोचने का विषय है।

सकपाल बाबा पढ़े लिखे थे अंग्रेजो के बीच जिंदगी बितायी। जवानी के दिन विदेशो में सूट बूट पहन के गुजारे। और डिग्रिया बटोरी।तो जाहिर सी बात है अंग्रेजो का असर तो आयेगा ही।उन्होंने सोचा की जब ये अंग्रेज मुट्टी भर होकर हम पे राज कर सकते है तो मैं क्यों नही।
बस यही से उन्होंने मिशन स्टार्ट किया।मिशन अम्बेडकर।

इसी मिशन के तहत उन्होंने एक शब्द दलित की रचना की जिसमे अछूतों के साथ कई अन्य जातियो को भी समाहित किया और एक वर्ग ओबीसी की कल्पना की जो की अछूत नही थे और न ही घृणित थे। केवल आर्थिक रूप से पिछड़े या कह सकते है गरीब थे और उनकी गरीबी का मुख्य कारण अंग्रेज और इस्लामिक आक्रमणकारी थे जिन्होंने उनकी सम्पदा को लूट कर अपने साथ ले गए। इसको समझने के लिए मेरी fb वाल https://www.facebook.com/rajmaurya.maurya.79 पे जाय।

अतः उन्होंने दलित के नाम पे एक वर्ग को अपने साथ जोड़ा और उन्हें हिन्दू धर्म के खिलाफ भड़काया।उन्होंने अपनी बुद्धि के अनुसार कई किताबे लिखी और उनमे धर्म को लेकर जहर घोला। उनकी लड़ाई ब्राह्मणो से थी लेकिन उन्होंने धर्म के खिलाफ लड़ाई शुरू की जिसे इस्लाम में जेहाद कहते है लेकिन ये जेहाद राजनैतिक था। अगर छुआछुत को मिटाने की बात होती और ब्राह्मणवाद की बात होती तो लड़ाई ब्राह्मण के खिलाफ होती । लेकिन उन्होंने धर्म के खिलाफ जहर उगला।वो चाहते तो अछूतों से ब्राह्मण का बहिस्कार करके खुद का ब्राह्मण स्वयं बनने को कहते।

उन्होंने अछूतों को लेकर लड़ाई लड़ी जिसका मैं भी समर्थन करता हूँ और हर व्यक्ति को करना चाहिए जातिपाति और छुआछुत के आधार पे किसी के साथ भेदभाव नही होना चाहिए । और इस विषय पे मैं उनके साथ हु जय भीम। लेकिन ये एक अलग विषय है मुद्दा ये नही ।तो आते है मुद्दे पर की सिर्फ बौद्ध ही क्यों चुना जबकि दुनिया में इस्लाम और इशाईयत का बोलबाला था।


उन्होंने इस्लाम क्यों नही स्वीकार किया क्योंकि इस्लाम एकेश्वर वाद पे है और फिर बाबा की पूजा कैसे होती।और बाबा की वो 22 प्रतिज्ञा को कैसे कुरआन में जोड़ते । और दूसरी बात इस्लाम सऊदी से चलता है और अम्बेडकर तो खुद राजा बनाना चाहते थे इस्लाम में जाकर उन्हें सऊदी का गुलाम बनाना पड़ता । और भारत में पहले से ही मुसलमान थे तो ये अपनी बातो को उनपर थोप  भी न  पाते।

ईसाई क्यों नही बने वही बात ईसाई बन कर बाइबल के अनुसार चलना पड़ता क्योंकि यहाँ पहले से अंग्रेज और इसाई थे और बाबा को उनके साथ चलना पड़ता। अपनी ज्ञान उनपर थोप न पाते और उनके इतिहास से छेड़छाड़ करने की औकात नही थी।

यही सारी समस्या सिक्ख और जैन धर्म के साथ थी। क्योंकि हर धर्म का धर्म गुरु भारत में पहले से मौजूद था। जिसको अम्बेडकर अपने प्रभाव में नही ला सकते।और उस धर्म में शामिल होने का मतलब उस धर्म के  अनुयायियों की संख्या बढ़ाना।।उस धर्म को शक्ति प्रदान करना जबकि शक्ति तो तो आंबेडकर स्वयं पाना चाहते थे।उसी संख्याबल के आधार पे राज भी करना चाहते थे। धर्म विशेष में शामिल होने से आंबेडकर को कुछ नही मिलता यह एक सत्य है।
 अतः उन्होंने बौद्ध धर्म चुना जिसको न कोई मानाने वाला न कोई जानने वाला और जिसका न कोई धर्म गुरु भारत में था। जिसके साथ ये अपनी term & condition आसानी से जोड़ सकते थे और कोई रोकने वाला भी नही था।और हिन्दू चूँकि बुद्ध को भगवान मानते थे तो उन्हें कोई बुद्ध से समस्या भी नही थी। और बुद्ध के नाम पे ही इन्होंने राजनीती की शुरुआत की लेकिन समय ने साथ दिया नही बीमार पड़े और चले गए बुद्ध की ओर।।

।।नमो बुद्धाय।। जय श्री राम।।

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