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Showing posts from February, 2018

चमार बनाया किसने ❓

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_हिन्दू सनातन काल से चमड़े का प्रयोग अपवित्र मानता था_ _पैरों में लकडी की खड़ाऊ पहनता था यानि चमडे का प्रयोग हिन्दू  करता ही नही था...._ _इसका सीधा सा मतलब है कि चमड़ा का काम करने वाली जाति चमार तो हिंदुओ ने नही बनायी।_ _ये बात और है कि मुगल सेनाओ को चमड़े की अधिक जरूरत थी तो शायद मुसलिमों ने ये जाति बनायी हो_ _जिसे हिंदुओ ने गाय का चमडा छीलने के कारण बहिष्कार कर दिया और ये अछूत बन गये।_ _मेहतर पासी किसने बनाया???_ _हजारो साल से हिंदुओ मे परम्परा रही है खुले मे शौच जाने की_ _घर के अंदर शौचालय हिंदुओ मे अपवित्र माना जाता था_ _आज भी गांव देहात मे लोग घर मे शौचालय नही बनाते उदाहरण स्वरूप आप टायलेट एक प्रेमकथा फिल्म देखलें।_ _जबकि मुगलकाल मे मुस्लिमों में पर्दा प्रथा के कारण औरते खुले मे नही जाती थी_ _इसलिये मुसलमान अपने घरों के अंदर शौचालय बनाते थे तथा मैला फिकवाने के लिये जिन लोगो का प्रयोग हुआ वे मेहतर कहलाये_ _इसी नीच काम की बजह से हिंदुओ ने इनको अछूत घोषित कर दिया।_ _अब सीधा सा मतलब ये है कि चमार और मेहतर समाज को बनाने का जिम्मेदार केवल मुसलमान है।_ _और सबस...

आंबेडकर ने क्यों बौद्ध धर्म चुना??

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भीमवादी कहते है की बुद्ध ही सत्य है वैज्ञानिक धर्म है यहाँ का मूल धर्म है। लेकिन इन बातो का कोई ठोस आधार नही।है । ये बाते सिर्फ तर्को से ही खण्डित हो जाती है। और अगर ये बाते सत्य थी तो इनमे अम्बेडकर को अपनी 22 प्रतिज्ञा जोड़ने की क्या आवश्यकता थी।। अब आते है की केवल बौद्ध धर्म ही क्यों चुना सिक्ख जैन  आर्यसमाज या फिर ईसाई और इस्लाम क्यों नही। एक तरफ आप ये भी कहते हो की इन धर्मो में जो लोग गए या जो धर्म बने वो जातिपात या छुआछुत के आधार पे बने तो फिर लोग बौद्ध धर्म में ही क्यों नही गए सिक्ख या इस्लाम या जैन ही  क्यों बने ? और जिन अंग्रेजो छुआछुत को मिटाया और आपको शिक्षा का अधिकार दिया आप ने उन्हें क्यों नही अपनाया ?। ये एक सोचने का विषय है। सकपाल बाबा पढ़े लिखे थे अंग्रेजो के बीच जिंदगी बितायी। जवानी के दिन विदेशो में सूट बूट पहन के गुजारे। और डिग्रिया बटोरी।तो जाहिर सी बात है अंग्रेजो का असर तो आयेगा ही।उन्होंने सोचा की जब ये अंग्रेज मुट्टी भर होकर हम पे राज कर सकते है तो मैं क्यों नही। बस यही से उन्होंने मिशन स्टार्ट किया।मिशन अम्बेडकर। इसी मिशन के तहत उन्होंने एक ...

भीमवाद का गुलाम बनता ओबीसी वर्ग

वर्तमान समय के परिपेक्ष्य में औबीसी युवाओं के जनचेतना की झलक 👉 औबीसी समाज का बच्चा जय भीम बोलेगा पर भीमवादियों से भीम के ओबीसी समाज के प्रति भीमकाय भेदभाव पर एक शब्द भी नहीं पुछेगा।। 👉ओबीसी का बच्चा मनुवाद बभनवाद दलित वाद में अभिरुचि काफी रखेगा पर कभी यह जानने की कोशिश नहीं करेगा ये सब से उसका और उसके आने वाले वंशंजों का क्या भला होने वाला है 👉ओबीसी का बच्चा नीलझंडा उठाएगा पर कभी यह नहीं जानना चाहेगा की कि नील झंडा क्या उसे एस सी एस टी एक्ट और क्रीमीलेयर जैसे संवैधानिक कुप्रथाओं से बचाएगा कि नहीं 👉ओबीसी का बच्चा आरक्षण आरक्षण चिल्लाएगा तो जरूर पर कभी यह नहीं जानना चाहेगा कि उसके आरक्षण का 89% आज के समय में माइनरटी किसी हक से पा रहे हैं 👉ओबीसी का बच्चा संविधान में आस्था तो रखेगा पर कभी यह नहीं जानना चाहेगा कि उस संविधान मे उसके लिए कितनी असमरुपता भेदभाव और कठोर नियम कानून बनाए गया है 👉ओबीसी का बच्चा पार्टि पालटिक्स में तो रहेगा पर अपने एम पी एम एल ए से ये नहीं जानना चाहेगा कि अमुख एम पी या एम एल ए ने उसे अपने शासन काल के दौरान क्या दिया और क्यों नहीं दिया 👉ओबीसी का बच्च...

भीमवादी का बुद्ध पर चुप्पी

दुर्गा एक वेश्या थी, लेकिन बुद्ध की अम्मा के योनि में दारु के नशे में सफेद हाथी घुस गया, ये हम नहीं बतायेंगे। बुद्ध की अम्मा ने बुद्ध के जन्म के कुछ दिन पहले दारु पीना छोड़ दिया। (मैं नहीं राहुल सांकृत्यायन ने ऐसा लिखा है) शूद्र पर हमने अत्याचार किये मगर बुद्ध ने महासुदर्शन सुत्त ,महागोविंद सुत्त में कहा है कि शूद्र का काम द्विजों की सेवा करना है- ये हम नहीं बतायेंगे। बुद्ध ब्राह्नण कहते थे खुद को, यही नहीं, सुत्तनिपात सुंदरिकभारद्वाज सुत्त में ब्राह्मण बनकर दान भी लेते हैं, ये हम नहीं बतायेंगे। बुद्ध की जातक कथाओं में ४००+ से अधिक उनके पिछले जन्म की बातें हैं, पर एक भी बुद्ध का जन्म भंगी,चमार,शूद्र के यहां नहीं होता। बुद्ध केवल ब्राह्मण या क्षत्रिय कुल में जन्म लेता है- ये राहुल सांकृत्यायन का बयान हम आरक्षण की तरह चाट लेंगे। मनु स्त्री विरोधी था। पर बुद्ध औरतों को धर्म के क्षेत्र में कीड़ा कहता है, उनको मोक्ष का अधिकार नहीं है कहता है। कहता है कि स्त्री से बेहतर है कि तुम एक चांडाल या पिशाच से बात कर लो। (लगता है अपनी अम्मा की बदचलनी का गुस्सा था) पत्नियों में दासी र...