चमार बनाया किसने ❓
_हिन्दू सनातन काल से चमड़े का प्रयोग अपवित्र मानता था_
_पैरों में लकडी की खड़ाऊ पहनता था यानि चमडे का प्रयोग हिन्दू करता ही नही था...._
_इसका सीधा सा मतलब है कि चमड़ा का काम करने वाली जाति चमार तो हिंदुओ ने नही बनायी।_
_ये बात और है कि मुगल सेनाओ को चमड़े की अधिक जरूरत थी तो शायद मुसलिमों ने ये जाति बनायी हो_
_जिसे हिंदुओ ने गाय का चमडा छीलने के कारण बहिष्कार कर दिया और ये अछूत बन गये।_
_मेहतर पासी किसने बनाया???_
_हजारो साल से हिंदुओ मे परम्परा रही है खुले मे शौच जाने की_
_घर के अंदर शौचालय हिंदुओ मे अपवित्र माना जाता था_
_आज भी गांव देहात मे लोग घर मे शौचालय नही बनाते उदाहरण स्वरूप आप टायलेट एक प्रेमकथा फिल्म देखलें।_
_जबकि मुगलकाल मे मुस्लिमों में पर्दा प्रथा के कारण औरते खुले मे नही जाती थी_
_इसलिये मुसलमान अपने घरों के अंदर शौचालय बनाते थे तथा मैला फिकवाने के लिये जिन लोगो का प्रयोग हुआ वे मेहतर कहलाये_
_इसी नीच काम की बजह से हिंदुओ ने इनको अछूत घोषित कर दिया।_
_अब सीधा सा मतलब ये है कि चमार और मेहतर समाज को बनाने का जिम्मेदार केवल मुसलमान है।_
_और सबसे बडी बात ये कि केवल यही दो जातिया ही मूलरूप से आरक्षण की सही हकदार है।_
_सबसे अधिक मानसिक और सामाजिक शोषण चमार और मेहतर का ही हुआ है।_
_इनके अलावा जो भी आरक्षण लेने वाली जातियां है वो इनका हक खा रही है भिखारी बनकर। कटु सत्य_
_पैरों में लकडी की खड़ाऊ पहनता था यानि चमडे का प्रयोग हिन्दू करता ही नही था...._
_इसका सीधा सा मतलब है कि चमड़ा का काम करने वाली जाति चमार तो हिंदुओ ने नही बनायी।_
_ये बात और है कि मुगल सेनाओ को चमड़े की अधिक जरूरत थी तो शायद मुसलिमों ने ये जाति बनायी हो_
_जिसे हिंदुओ ने गाय का चमडा छीलने के कारण बहिष्कार कर दिया और ये अछूत बन गये।_
_मेहतर पासी किसने बनाया???_
_हजारो साल से हिंदुओ मे परम्परा रही है खुले मे शौच जाने की_
_घर के अंदर शौचालय हिंदुओ मे अपवित्र माना जाता था_
_आज भी गांव देहात मे लोग घर मे शौचालय नही बनाते उदाहरण स्वरूप आप टायलेट एक प्रेमकथा फिल्म देखलें।_
_जबकि मुगलकाल मे मुस्लिमों में पर्दा प्रथा के कारण औरते खुले मे नही जाती थी_
_इसलिये मुसलमान अपने घरों के अंदर शौचालय बनाते थे तथा मैला फिकवाने के लिये जिन लोगो का प्रयोग हुआ वे मेहतर कहलाये_
_इसी नीच काम की बजह से हिंदुओ ने इनको अछूत घोषित कर दिया।_
_अब सीधा सा मतलब ये है कि चमार और मेहतर समाज को बनाने का जिम्मेदार केवल मुसलमान है।_
_और सबसे बडी बात ये कि केवल यही दो जातिया ही मूलरूप से आरक्षण की सही हकदार है।_
_सबसे अधिक मानसिक और सामाजिक शोषण चमार और मेहतर का ही हुआ है।_
_इनके अलावा जो भी आरक्षण लेने वाली जातियां है वो इनका हक खा रही है भिखारी बनकर। कटु सत्य_

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